देखो बसंत आया है
सबके मन को भाया है
चारो ओर रंग-बिरंगे फूल खिले है
मौसम भी सुहाना है
मन मुस्कुरा रहा है
तन झूमने को करता
रंग-बिरंगे गुलाल लेकर
बच्चे इधर-उधर है डोले
कभी किसी के सर पर डाले
तो कभी किसी को बाँहों में भर ले
आया बसंत आया
सबके मन को भाया।
यूँ ही प्यार जताना बच्चो मेरे संग आ जाना बच्चो हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों घूम फिरकर हंसी - ठिठोली मुझसे तुम कर जाना बच्चो नन्हे-नन्हे ...
देखो बसंत आया है
सबके मन को भाया है
चारो ओर रंग-बिरंगे फूल खिले है
मौसम भी सुहाना है
मन मुस्कुरा रहा है
तन झूमने को करता
रंग-बिरंगे गुलाल लेकर
बच्चे इधर-उधर है डोले
कभी किसी के सर पर डाले
तो कभी किसी को बाँहों में भर ले
आया बसंत आया
सबके मन को भाया।
आज मुझे किसी ख़ास का इंतज़ार है
जो वर्षों पहले छूट गया था कही
उसका इंतज़ार मुझे आज है
वो है अपना-अपना सा
जब भी उसे देखती हूँ
आँखों में आंसू और दिल में दर्द सा उठता है
ज़िन्दगी कितनी विरान हो गयी थी
आज मेरे मन में सैकड़ों दीप जगमगाये है
दिवाली बेमौसम आज मेरे घर आयी है।
आदमी है आदमी से आज परेशान
हर आदमी अंदर से है डरा-डरा
कब कौन ऐसा मिल जाये
जो ठग के ले जाये सब कुछ
हर बात पर है धरना का ख़ौफ़
राह रोककर खड़े हो गए
सबकुछ अस्त-व्यस्त कर डाला
ज़िन्दगी को संवार सकते नहीं
बिगाड़ने पर आतुर हर दम रहते है।
गणतंत्र दिवस है आया
हम सबकी खुशियां लाया
वीरों पे फक्र हो आया
वीरों ने देश बचाया
अपनी क़ुरबानी देकर
और हर ओर विजय लहराया
संविधान हमारा बनकर के
इस दिन को हमें मिला था
इस पावन दिन को तब से
हर वर्ष मनाते है हम
इस पावन पर्व पर खुशियाँ।
रोज़ सपने में आओ
शगुन दे के जाओ
साथ खुशियाँ मनाओ
हर्ष में गीत गाओ
लहरों पे झूम जाओ
कभी रूठ जाओ कभी फिर मनाओ
मेरे स्वप्न में रोज़ ऐसे ही आओ
माँ तुम्हारी याद मेरे दिल में बसती है
तू नज़र के सामने मुझे रोज़ दिखती है
ख्वाब में भी माँ मुझे दिल से लगाती है
प्रेम का अपना शगुन मुझे दे के जाती है
माँ मेरी मुझको तेरी बड़ी याद आती है
हर कठिन रस्ते में माँ की याद आती है
क्या करू कैसे तुम्हे दिल से लगाऊं माँ
माँ तुम क्यों दूर हो, मेरे पास आओ माँ।
आज के इस ज़माने में
हर आदमी का
अपना एक मकान होना चाहिए
मुक़ाम मिले ना मिले
मकान मिलना चाहिए
ज़िन्दगी दर बदर की ठोकरों से
गुलज़ार है
दिन में ख़ामोशी तो
रात में आँसुओ की दूकान है
हर इंसान के दिल में
चल रहा आज तूफ़ान है
अकेली ज़िन्दगी कटती नहीं
दिल के कोने में बस्ता एक शमशान है
मकान से ही इंसान की पहचान है
वर्ना तो हर आदमी यहाँ
एक किरायदार है।