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जीना सीखा
तील-तील जलकर जीना सीखा अपनों से कुछ कहना सीखा हँसना सीखा, रोना सीखा हर गम को अब पीना सीखा धूप - छाँव को सहना सीखा नरम - गरम और ऊंच - नी...
शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
जीना सीखा
गुरुवार, 17 सितंबर 2026
प्रीत विरह की
दर्द लिखू या गीत लिखूं मै
मित बता क्या रित लिखूं मै
सुबह - शाम की प्रीत लिखूं या
तेरे विरह की गीत लिखूं मै
दोपहरी की धुप लिखूं या
रात की सुनी - सुनी बगिया
अपने दिल के गीत लिखूं मैं
आज बता मैं विरह लिखूं मैं
अपनी -तेरी प्रीत लिखूं मैं
खट्टे - मीठे गीत लिखूं या
कोई नया संगीत लिखूं मैं
तेरे संग की प्रीत लिखूं या
उलझन के कुछ गीत लिखूं
मित बता क्या रित लिखूं मै
दर्द लिखू या गीत लिखूं मै।
मंगलवार, 18 अगस्त 2026
सच कहुँ
सच कहुँ आज मैं कुछ ख़ास लिख रही हूँ
अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ
तुम सबकी नन्ही मुस्कान से मिली ताकत
आज मैं जीने के अरमान लिख रही हूँ
तुम सब यूँही मेरे आस-पास रहो
अपने साथ बीते हुए लम्हों के एहसास लिख रही हूँ
तुम संग-संग रोऊँ-हंसू उछल-कूद मैं करूँ
गम भूल सारे जाऊँ संग-संग तुम्हे हंसाऊँ
हर अदा पे तुम्हारे मैं वारी-वारी जाऊं
सच कहुँ आज मैं कुछ खास लिख रही हूँ
अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ
हर रोज़ बनती तुमसे पहचान लिख रही हूँ।
सोमवार, 17 अगस्त 2026
बारिश की बूंदे
एक दिन बारिश की बूंदो को टपकते हुए देखा
टपकते ही आपस में मिलते हुए देखा
न उन्हें टूट जाने का गम था
न उन्हें बादल से बिछड़ जाने का गम था
बच्चों की किलकारी और हंसी में
उन्हें भी मज़ा आ रहा था
सब ओर ख़ुशी-ख़ुशी थी
बच्चे उछल-उछल कर खुश थे
पानी उनपर बिखर-बिखर के खुश था।
रविवार, 26 जुलाई 2026
स्वयं
कठिन वक्त है
कठिन घड़ी है
कठिन राह पर चलकर हमको
मंज़िल अपनी पानी है
अपनी अदा जो उत्तम हो
वह करके दिखलाना है
कुछ लोगो से सिख सके तो
कुछ उनको सिखलायेंगे
अपने हृदय की कोमलता से
सबको परिचित करवाना है
कुछ कमियां हो अपने अंदर
फ़ौरन दूर उसे करना है
जीवन हर पल कुछ सिखलाता
हर पल कुछ है देकर जाता
कदम - कदम पर धुप - छाँव है
ग़म और खुशियों का संगम है
बच्चो के संग बच्चा बनकर
जब उनके संग तुतलाते है
कुछ उनकी सुनकर हँसते
कुछ अपनी उनको समझाते
ऐसा लगता मानो उस क्षण
मैं भी बच्ची बन जाती हूँ
अपना बचपन भूल चुकी जो
आज उसे फिर जी लेती हूँ।
रविवार, 28 जून 2026
शिक्षक दिवस
आओ मेरे प्यारे बच्चों
सब मिलकर कुछ गाते है
हंसी - ख़ुशी से गाते - गाते
नया आज भी कुछ करते है
शिक्षक दिवस के इस पावन दिन
ज्ञान की ज्योति जलाते है
गुरु शिष्य के पावन रिश्ते
नए - नए आयाम गढ़ेंगे
आओ मेरे प्यारे बच्चों
सब मिलकर कुछ गाते है
यह पावन दिन है हम सबका
मिलकर हम सब गाते है।
शुक्रवार, 26 जून 2026
खो गयी बिटिया
बुधवार, 24 जून 2026
हिंदी
ये हिंदी ये हिंदी
है भारत माँ की बिंदी
ये हिंदी ये हिंदी
अपनी खुशियों की कुंजी
ये हिंदी ये हिंदी
हर दिल में बस्ती हिंदी
है प्यार की भाषा हिंदी
जज़्बात सिखाती हिंदी
है राह दिखाती हिंदी
हमको है भाती हिंदी
अपनी मर्यादा हिंदी
है जान से प्यारी हिंदी
ये भारत माँ की बिंदी।
सोमवार, 22 जून 2026
सच्चाई
सच्ची बात बताता हूँ
आज तुम्हे समझाता हूँ
हर पल खुशियों को चाहो
गम को पास न आने दो
जीत हमेशा पाओगे
भय को जीत जो जाओगे
गर्व सदा खुद पर रखना
हर मुश्किल से डटकर लड़ना
अपनी राह बनाना खुद ही
कभी किसी की राह न रोको
अपनी राह में ताकत झोंको
जीत मिलेगी ख़ुशी मिलेगी
शान्ति और सुकून भी होगा
काटम - काटी ताका - झांकी
सब सस्ते हथकंडे है
मंज़िल कभी न बनती इनसे
मन में हरदम धुक - धुक रहती
परछाई से भी डर लगता।
रविवार, 21 जून 2026
ज़िन्दगी
जबतक रहेगी ए ज़िंदगी
शिकायतों का दौर भी रहेगा
किसी से प्यार तो किसी की नाराज़गी भी मिलेगी
कोई आएगा करीब
तो कोई मुँह फुला कर दूर चला जाएगा
किसी से संबंध बनेंगे अंतर्मन से
तो कुछ संबंध बिगड़ेंगे भी
किसी से प्यार का सैलाब मिलेगा
तो कुछ पीठ पीछे शिकायत भी करेंगे
कही अपनों से दूराव मिलेगा
तो कभी गैरों से भी अपनों सा प्यार मिलेगा
यूँही कर्मपथ पर चलते रहेंगे
अपने भावों को शुद्धता से भरते रहेंगे
कुछ खट्टे तो कुछ मीठे अनुभवों से
अपनी ऊर्जा यूँ ही संजोते रहेंगे।
गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
पहेली
मैं हमेशा एक पहेली थी
अब भी हूँ आगे भी रहूंगी
मुश्किल है समझ पाना मुझे
जो भी मिला उसके साथ हो लिए
जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी
जिसने अपना बनाया
उसके पल में हो लिये
पर जिसने भी नज़रअंदाज़ किया
झट मुँह फेर के मुस्कुरा के चल दिए
ऐसा न था कि हमें दर्द न था
उनके खोने का
पर उससे ज़्यादा कही
फ़क्र था अपने आप पर
जो समझ में आया नहीं
उस पर वक्त क्यों बर्बाद करे
जिसको कदर है नहीं प्यार की
उनके लिए हम अपने आँसूं
क्यों ही जाया करे।
रविवार, 19 अप्रैल 2026
ध्रुवतारा
मैं अलबेली एक अकेली
ध्रुवतारा सा चमचम करती
शाम झुण्ड में सुबह अकेली
हरदम सबको राह दिखाती
ध्रुवतारा है नाम हमारा
समय - समय पर मैं दुनिया का
समय बोध का ज्ञान कराती
रात सुलाना सुबह जगाना
रहा निरंतर काम हमारा
कभी कोई भी देर न होता
ना मैं ची-ची चूं-चूं करती
पर अब देखो घर-घर में
घड़ियों का है बोल-बाला
फिर भी है सब देर-सवेर
भागम-भागी गुत्थम-गुत्था
दिनचर्या सबकी है लेट।
रविवार, 12 अप्रैल 2026
मेरे आँगन में
रोज़ सवेरे मेरे आँगन
चिंटू - मिंटू, चिंकी - मिन्की
ढेरो बच्चे आते है
उछल - कूद कर हमें हँसाते
प्यार से मेरी गोदी में आते
अपनी मीठी तुलतुलाती सी
नए - नए शब्दों से मुझको
अपनी बात बताते है
थोड़ा रोना, थोड़ा हंसना
पूरी मस्ती करते है
हँसी ख़ुशी जब घर वो जाते
बाय - बाए जब करते है
उनके चेहरे की खुशियों से
अपना दिन बन जाता है
सोच - सोच मैं इनकी बाते
इतनी खुश हो जाती हूँ
अपनी मुश्किल भूल हमेशा
इनके संग हो लेती हूँ
इनके बचपन के संग - संग में
अपना बचपन जी लेती हूँ
मेरे आँगन हर दिन आये
ऐसे ही बचपन का झोंका
जिनमे झूम के मैं गाऊँ
हर दिन खुशियों से भर जाऊँ ।
गुरुवार, 26 मार्च 2026
कठिनाई
सच कहूं ज़िन्दगी आसान नहीं होती
हर पल लड़कर तूफ़ान से
जब चेहरे पर मुस्कान आती है
वो सौ तूफानों से लड़ने की
और ताकत दे जाती है
हमने तो ज़िन्दगी को बड़े करीब से देखा है
हर मुश्किल को लड़कर जीता है
हर मुश्किल से एक नया सबक सीखा
आज ऐसा लगता है कि
अगर ये मुश्किलें न होती तो
शायद इतनी खूबसूरत मुस्कान भी न होती
शायद इतना दिल में प्यार भी न होता
हर किसी से जुड़ जाऊँ एहसास भी न होता
सबकी उलझन को पल में सुलझाऊँ
झट से सबकी दोस्त बनजाउं
ये सब उन मुश्किलों ने ही सिखाया है
मुश्किल न हो तो जीने का मज़ा ही नहीं है।
बुधवार, 25 मार्च 2026
आओ पेड़ लगाए
आओ बच्चों पेड़ लगाए
एक जादू तुमको दिखलाये
डालो बीज पेड़ बनेगा
हरा - भरा यह बाग़ बनेगा
जब तुम इसको देखोगे
हंसी - ख़ुशी तुम गाओगे
पेड़ को दोस्त बनाओगे
पानी डाल ख़ुशी से इनको
इनपर खुशियां बरसाओगे
धरती को कटने से बचाओगे
आओ बच्चों पेड़ लगाए।
शनिवार, 4 अक्टूबर 2025
सपने
आँखों में सपने थे
ढेरो अरमान थे दिल में
कुछ अलग करने की
हमने भी ठानी थी
सपने बड़े बड़े थे
पर साधन बहुत सीमित थे
मंज़िल आँखों के सामने थी
पर रास्ता बड़ा कठिन था
हमारे अरमानो का
कोई सहयोगी न था
हर ओर विरोध के ही स्वर थे
किसी को भरोसा न था हम पर
परिस्थितियाँ भी हमसे
तूफ़ान की तरह टकराते थे
ग़म का तो ऐसा था
जैसे हमसे प्यार ही हो गया हो
चुनातियाँ भरपूर थी
वक्त हाथों से फिसलता जा रहा था
पर हिम्मत अभी भी बाकी थी
धैर्य टूट सा रहा था
लेकिन मुझे फिर भी
किसी करिश्मे की उम्मीद थी
और ऐसा ही हुआ
जब सबकुछ चारो तरफ
टूट सा रहा था
मेरे सपने आकार ले रहे थे
मैं ज़िन्दगी में वापसी कर रही थी
सबकुछ पटरी पर आ गया
हाँ कठिनाइयाँ तो ज़रूर आयी पर
सफलता ने हमारे कदम चूमे
और मेरा वो सपना जो
मैंने बचपन में देखा था
धीरे - धीरे पूरा हो रहा है।
मंगलवार, 23 सितंबर 2025
मेरे बच्चों
मेरे बच्चों पढ़ते जाओ
आगे -आगे बढ़ते जाओ
विद्या का वरदान मिलेगा
गुरु से विद्या दान मिलेगा
कदम - कदम पर साथ मिलेगा
गुरु का सर पर हाथ मिलेगा
आसमान पर चढ़ते जाओ
आगे -आगे बढ़ते जाओ
खुशियों का संसार बसाओ
मेरे बच्चों पढ़ते जाओ
आगे -आगे बढ़ते जाओ।
गुरुवार, 18 सितंबर 2025
पहाड़
हमको बुलाये ए हरियाली
ए पहाड़ के आँचल
हमको छूकर जाये, बार-बार ये बादल
कभी दूर तो कभी पास ए
करते रहे ठिठोली
भोर - सांझ ये आते जाते
होठों पर खुशियाँ दे जाते
दिन ढलते ही झम - झम करके
खूब बरसते है ये बादल
गड़ - गड़ करके झड़ - झड़ करके
धाराएँ बहती जाती है
देख - देख हम खुश होते है
यहां का मौसम कितना प्यारा
पर पहाड़ के वासिंदों को
होती बहुत कठिनाई इससे।
शुक्रवार, 8 अगस्त 2025
बैठे - बैठे
एक दिन बैठे - बैठे यूँ ही सोचती रही
क्या पाया क्या खोया हमने
कुछ मिले नए कुछ बिछड़े हमसे
कुछ शोहरत कुछ गुमनामी में
जीवन दिया ए काट
ना नींद पूरी हुई
और ना ही ख्वाब
वक्त ने हरदम कहा
सब्र थोड़ा रख
वक्त से हमको शिकायत
कुछ शिकायत वक्त को भी
धीरे - धीरे चलता रहा
मंज़िल ज़रूर मिलेगी
रस्ते कठिन भी है तो
खुशियां मिलेगी एक दिन
वो दिन भी आएगा जब
खुद के ख्यालो में ही
खुद को याद कर के
आ जाएगी हँसी, जीवन को याद करके।
रविवार, 13 जुलाई 2025
पापा
पापा मेरे सपनों का वो प्रतिबिम्ब है
जो हमारे हर सपने को पूरा करते है
हमारी हर जिज्ञासा को पूरा करते है
हमारे लड़खड़ाते कदम को हाथों से संभालते है
गोद में लेकर हमें बाहर का नज़ारा दिखाते है
हमारे हर सवाल का जवाब बड़ी मासूमियत से देते है
अब तो पापा माँ का भी आधा फ़र्ज़ निभाते है
लोड़ी सुना कर हमें सुलाते भी है
मम्मी की जगह बच्चों को
नींद में भी पापा ही याद आते है
पापा आपके ढ़ेर सारे प्यार के लिए
आपको ढ़ेर सारा धन्यवाद।