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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

मंगलवार, 9 जनवरी 2024

मेरे गम

ऐ जो गम है मेरे हमसफ़र है मेरे 

खुशियाँ छूट जाये पर ऐ छूटे भूल से ना 

जिनसे थी उम्मीद मुझे 

उनसे ही सबसे ना उम्मीद हो गए 

मेरे गम ने जो मुझे आईना दिखाया 

हम खुद से ही बेनकाब हो गए 

सच साबित न कर सके हम कभी 

झूठ के आगे ही बेज़ुबान जितना मुझे 

आज अपनी आँसुओं से दूर उतने हो गए। 

रविवार, 7 जनवरी 2024

मंज़िल

मंज़िल-मंज़िल करते हैं हम 

मंज़िल का कोई भान नहीं है 

कोई उसका रंग नहीं है 

कोई उसका नाम नहीं 

नाँव लहर से टकरा कर 

दूर किनारे जा रूकती है 

फिर भी नाविक लेकर उसको 

पुनः लौट है जाता 

बार-बार गिरकर भी उठना 

ठोकर खा-खा कर भी चलना 

नए-नए आयाम को गढ़ना 

रोज़ नए अनुभव से मिलना 

रोज़ नयी मुश्किल से लड़ना 

यही है मंज़िल यही राह है 

दोनों संग-संग चलते रहते 

जीवन का बस एक मंत्र है 

हरदम आगे बढ़ते रहना। 

शनिवार, 6 जनवरी 2024

बढे चलो

बढे चलो बढे चलो 

दूर नहीं है मंज़िल 

कुछ ख़ास नहीं है मुश्किल 

राह पथरीले ज़रूर है 

पर इतनी भी मुश्किल नहीं 

सफर आसान हो जायेगा 

जब चेहरे पर मुस्कान आएगा 

अपने में हौसला रखना सीख लो 

बढे चलो रास्ता मुश्किल ही सही 

मंज़िल तक जाती तो है 

सपनो में  रंग भरना है तो 

संभलकर चलना ही पड़ेगा 

मुश्किलें आसान हो जाती है 

जब इरादे पक्के हो। 

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

पतंग

आसमान में उड़ी पतंग 

दूर-दूर तक चली पतंग 

कभी लड़ी फिर कटी पतंग 

गिर कर भी फिर उड़ी पतंग 

एक दूसरे से भिड़ी पतंग 

रंग-बिरंगी छोटी-बड़ी 

आसमान में सजी पतंग 

काटम-काट गुथ्थम-गुथ्था 

एक दूसरे से भिड़ी पतंग

दूर-दूर तक उडी पतंग। 

गुरुवार, 28 दिसंबर 2023

सुबह

भोर में जब मिली चाँद तारों से मैं 

उनकी मुस्कान में एक अजब बात थी 

एक नया जोश था एक नयी बात थी 

सुबह की आहट से फैली थी जो रौशनी 

हर तरफ का नज़ारा गज़ब था दिखा 

हवाओं में थोड़ी सी ठिठुरन भी थी 

रात सपने में जो हमने देखा था कल 

आज उसको मुकम्मल करना जो था 

कोई सपना हमारा अधूरा न हो 

कोई मंज़िल हमारी न छूटे कभी। 

गुलाब

 सब फूलों में सुन्दर फूल 

फूल गुलाब है सुन्दर फूल 

लाल-पीला काला-नीला 

हर रंगों में मिले ये फूल 

बिछड़ों को भी खूब मिलाये 

रूठों को भी दोस्त बनाये 

उदास चेहरे पर ख़ुशी लाये।

रविवार, 24 दिसंबर 2023

खोता बचपन

आज के इस दौर में बचपन जैसे खो सा गया है 

खोता बचपन दोषी कौन 

घुटता बचपन दोषी कौन 

आज के माहौल में बच्चों का दुश्मन कौन 

इन मासूम बच्चों के जीवन का 

सबसे बड़ा अपराधी कौन 

सब मौन है सब है खामोश 

बचपन दम तोड़ रही है 

हर तीसरा बच्चा गूंगा-बहरा और स्पेशल है 

इस माहौल का ज़िम्मेदार कौन 

हर बच्चा अकेलेपन का है शिकार 

मायूस होती उनकी हंसती खेलती ज़िन्दगी 

कौन सुने उनकी इच्छाएं 

दादी-दादा के पास टाइम नहीं 

मम्मी-पापा मजबूर है 

नानी-नाना के सर पर ही सारा बोझ है।