यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्रियतम

हे प्रियतम तुम रूठी क्यों  है कठिन बहुत पीड़ा सहना  इस कठिन घड़ी से जो गुज़रा  निःशब्द अश्रु धारा बनकर  मन की पीड़ा बह निकली तब  है शब्द कहाँ कु...

गुरुवार, 4 मई 2017

ईश्वर

“तुम मुझे देख नहीं सकते हो,
      पर मैं वह ज्योति हूँ जिसके द्वारा तुम देखते हो.
तुम मुझे सुन नहीं सकते हो,
      पर मैं वह ध्वनि हूं जिसके द्वारा तुम सुनते हो.
तुम मुझे जान नहीं सकते हो,
      पर मैं वह सत्य हूँ जिसके द्वारा तुम जीते हो.”


-    सत्य साईबाबा 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें