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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

मकान

आज के इस ज़माने में 

हर आदमी का 

अपना एक मकान होना चाहिए 

मुक़ाम मिले ना मिले 

मकान मिलना चाहिए 

ज़िन्दगी दर बदर की ठोकरों से 

गुलज़ार है 

दिन में ख़ामोशी तो 

रात में आँसुओ की दूकान है 

हर इंसान के दिल में 

चल रहा आज तूफ़ान है 

अकेली ज़िन्दगी कटती नहीं 

दिल के कोने में बस्ता एक शमशान है 

मकान से ही इंसान की पहचान है

वर्ना तो हर आदमी यहाँ 

एक किरायदार है। 

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" शनिवार 20 जनवरी 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

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