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जीना सीखा

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मंगलवार, 21 जुलाई 2020

बहुरानी

शादी के जोड़े में सजकर 
आई एक दिन बहुरानी 
पांव में मेहंदी  रंग आलता 
सोलह श्रृंगारों  से सजकर 
सर पे घूँघट पाजेब पांव में 
छुई मुई सी बहुरानी 
सबकी नजरे टिकी हुई है 
आई कैसी बहुरानी 

शादी के जोड़े में सजकर 
आई एक दिन बहुरानी 
अपने घर को छोड़छाड़ कर 
इस घर को अपनाना है 
नई नवेली दुल्हन बनकर 
रिश्ते नए बनाना है 

शादी के जोड़े में सजकर 
आई एक दिन बहुरानी 
लोग नए है गावं नया है
 सारे अब जज्बात नए है 
गम और खुशियां दोनों को 
हमको अब संग - संग जीना है 

शादी के जोड़े में सजकर 
आई एक दिन बहुरानी
 बहुरानी के संग - संग अब 
पत्नी भाभी सब बनना है 
सबके दिल को भाये ऐसा 
हर पल कोशिश ये करना है। 


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