यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

पहेली

मैं हमेशा एक पहेली थी  अब भी हूँ आगे भी रहूंगी  मुश्किल है समझ पाना मुझे  जो भी मिला उसके साथ हो लिए  जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी  ज...

बुधवार, 21 जून 2017

नैनीताल

पहाड़ों का राजा नैनीताल
लंबे-लंबे पेड़, झाड़ियाँ बड़ी-बड़ी
हर तरफ धरती हरी चादरों से ढकी
चिड़ियों का चहचहाना
बंदरों का उछलना और किंकियाना
घोड़ों की टाप की आवाज़
पानी की धार का पहाड़ियों से टकराना
पहाड़ों के बीच बने छोटे-छोटे गेस्ट हाउस
शांत पहाड़ी के वातावरण में
गाड़ियों की गरगराहट का
रुक-रुक कर आना
सुबह धुप का खिलना
चाँद घंटों में ही बादलों से घिर जाना
फिर टिप-टिप गिरती बारिश की बुँदे
कानों को सुकून दे जाती है
आँखों में वादियों की ख़ूबसूरती को
समेटे हुए हम चल पड़े
इस यात्रा के यादों को
शब्दों में समेटा हैं
नैनीताल की ख़ूबसूरती को
आप तक पहुँचाने की

एक छोटी सी कोशिश हैं हमारी!!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें